श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.64.19 
एवमुक्त्वा तु संरब्धं कुम्भकर्णं महोदर:।
उवाच रक्षसां मध्ये रावणं लोकरावणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में भरे हुए कुम्भकर्ण से ऐसा कहकर महोदर ने समस्त राक्षसों के बीच बैठे हुए तथा जगत को रुलाने वाले रावण से कहा-॥19॥
 
Having said this to Kumbhakarna who was filled with rage, Mahodar said to Ravana who was sitting in the midst of all the demons and who makes the world cry -॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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