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श्लोक 6.64.18  |
यस्य नास्ति मनुष्येषु सदृशो राक्षसोत्तम।
कथमाशंससे योद्धुं तुल्येनेन्द्रविवस्वतो:॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हे दैत्यों के शिरोमणि! जो मनुष्यों में इन्द्र और सूर्य के समान तेजस्वी हैं, उन श्री रामजी के साथ युद्ध करने का साहस तुम कैसे कर पाते हो?॥18॥ |
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| O head of demons! How do you muster the courage to fight with Shri Ram, who is as radiant as Indra and the Sun, among men?'॥18॥ |
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