श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.64.14 
तं सिंहमिव संक्रुद्धं रामं दशरथात्मजम्।
सर्पं सुप्तमहो बुद्‍ध्वा प्रबोधयितुमिच्छसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
दशरथपुत्र श्री राम क्रोधित सिंह के समान भयंकर और पराक्रमी हैं। क्या तुम उनसे युद्ध करने का साहस करते हो? क्या तुम जान-बूझकर सोए हुए सर्प को जगाना चाहते हो? तुम्हारी मूर्खता आश्चर्यजनक है!॥14॥
 
‘Dasaratha's son Shri Ram is as fierce and valiant as an enraged lion. Do you dare to fight him? Do you deliberately want to wake up a sleeping snake? Your foolishness is astonishing!॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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