श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.63.54 
आदित्यं पातयिष्यामि सनक्षत्रं महीतले।
शतक्रतुं वधिष्यामि पास्यामि वरुणालयम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
मैं पृथ्वीपर तारोंसहित सूर्यको भी उतार लाऊँगा, इन्द्रको भी मार डालूँगा और समुद्रको भी पी जाऊँगा॥ 54॥
 
‘I will bring down the Sun along with the stars on the Earth, I will kill Indra as well and I will drink up the ocean as well.॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)