श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.63.53 
अपि देवा: शयिष्यन्ते मयि क्रुद्धे महीतले।
यमं च शमयिष्यामि भक्षयिष्यामि पावकम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं क्रोध करूँ, तो देवता भी नष्ट हो जाएँ। (मनुष्य और वानरों का तो क्या?) मैं यमराज को भी शांत कर दूँ। मैं सर्वभक्षी अग्नि को भी भस्म कर दूँ॥ 53॥
 
‘If I get angry, even the gods will be destroyed. (Then what about humans and monkeys?) I will calm even Yamraj. I will consume even the all-consuming fire.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)