श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.63.52 
यदि चेन्द्राद् भयं राजन् यदि चापि स्वयंभुव:।
ततोऽहं नाशयिष्यामि नैशं तम इवांशुमान्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि तुम्हें इन्द्र या स्वयंभू ब्रह्मा से भी भय हो तो मैं उस भय को उसी प्रकार नष्ट कर दूँगा, जैसे सूर्य रात्रि के अन्धकार को नष्ट कर देता है।
 
O King! If you are afraid of Indra or even of the self-born Brahma, I shall destroy that fear in the same manner as the sun destroys the darkness of the night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)