श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.63.40 
कथं च राक्षसैरेभिर्मया च परिसान्त्वित:।
जिघांसुभिर्दाशरथिं व्यथसे त्वं सदानघ॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे पापरहित दैत्यराज! ये दैत्य और मैं सब मिलकर दशरथपुत्र राम को मारना चाहते हैं और हमने तुम्हें भी ऐसा करने का आश्वासन दिया है। तुम क्यों सदा व्याकुल रहते हो?॥40॥
 
O sinless king of demons! These demons and I all wish to kill Rama, son of Dasharatha and have assured you of the same. Why do you remain distressed all the time?॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)