श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.63.22 
तत् तु श्रुत्वा दशग्रीव: कुम्भकर्णस्य भाषितम्।
भ्रुकुटिं चैव संचक्रे क्रुद्धश्चैनमभाषत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण के ये वचन सुनकर दसमुख वाले रावण ने भौंहें चढ़ाकर क्रोधपूर्वक उससे कहा-॥22॥
 
On hearing these words of Kumbhakarna, the ten-faced Ravana arched his eyebrows and angrily said to him -॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)