श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.63.18 
तान् भर्ता मित्रसंकाशानमित्रान् मन्त्रनिर्णये।
व्यवहारेण जानीयात् सचिवानुपसंहितान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब किसी मामले या कार्य पर निर्णय लेने के लिए मंत्रियों की सलाह ली जा रही हो, तो राजा को अपने आचरण से उन मंत्रियों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए, जो रिश्वत आदि लेकर शत्रु से हाथ मिला चुके हैं और वास्तव में शत्रु के लिए काम कर रहे हैं, जबकि वे उसके मित्र होने का दिखावा कर रहे हैं।
 
When the advice of ministers is being sought for deciding on any matter or task, the king should try to identify through his conduct those ministers who have joined hands with the enemy by taking bribes etc. and are actually working for the enemy while pretending to be his friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)