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ramayan 6.62.5: जब कुंभकर्ण राक्षसों सहित अपने भाई के महल में जाता था, तब जब वह एक कदम आगे बढ़ता था, तो पृथ्वी काँप उठती थी ॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.62: कुम्भकर्ण का रावण के भवन में प्रवेश तथा रावण का राम से भय बताकर उसे शत्रुसेना के विनाश के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.62.5 
भ्रातु: स भवनं गच्छन् रक्षोगणसमन्वित:।
कुम्भकर्ण: पदन्यासैरकम्पयत मेदिनीम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब कुंभकर्ण राक्षसों सहित अपने भाई के महल में जाता था, तब जब वह एक कदम आगे बढ़ता था, तो पृथ्वी काँप उठती थी ॥5॥
 
When Kumbhakarna along with the demons went to his brother's palace, every time he took a step forward, the earth would tremble. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)