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श्लोक  6.62.4 
स तत्तदा सूर्य इवाभ्रजालं
प्रविश्य रक्षोधिपतेर्निवेशनम्।
ददर्श दूरेऽग्रजमासनस्थं
स्वयंभुवं शक्र इवासनस्थम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जैसे सूर्य बादलों के पीछे छिप जाता है, वैसे ही कुंभकर्ण ने दानवों के राजा के महल में प्रवेश किया और दूर से अपने भाई को राजसिंहासन पर बैठे देखा, मानो भगवान इंद्र ने स्वयंभू ब्रह्मा को दिव्य कमल सिंहासन पर बैठे देखा हो।
 
Just as the Sun hides behind the clouds, Kumbhakarna entered the palace of the King of Demons and saw his brother from a distance sitting on the royal throne, as if Lord Indra had seen the self-born Brahma seated on a divine lotus throne.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)