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त्वय्यस्ति मम च स्नेह: परा सम्भावना च मे।
देवासुरेषु युद्धेषु बहुशो राक्षसर्षभ॥ २१॥
त्वया देवा: प्रतिव्यूह्य निर्जिताश्चासुरा युधि॥ २२॥
अनुवाद
'मुझे आपसे बहुत स्नेह है और आपसे बड़ी आशाएँ हैं। हे दैत्यराज! देव-असुर युद्ध के अवसरों पर आपने अनेक बार प्रतिद्वन्द्वी का रूप धारण करके देवताओं और असुरों को युद्धभूमि में परास्त किया है।
‘I have great affection for you and I have great expectations from you. O king of demons! On occasions of Devas-Asuras war, you have taken the position of an opponent many times and defeated the Gods and Asuras on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥