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ramayan 6.62.15-16h: "हाय! देखो! समुद्र पर सेतु बनाकर प्रसन्नतापूर्वक यहाँ आए हुए वानरों ने लंका के समस्त वन और उद्यानों को जल से परिपूर्ण कर दिया है - यहाँ वानरों रूपी जल का समुद्र लहरा रहा है॥15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.62: कुम्भकर्ण का रावण के भवन में प्रवेश तथा रावण का राम से भय बताकर उसे शत्रुसेना के विनाश के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 62: कुम्भकर्ण का रावण के भवन में प्रवेश तथा रावण का राम से भय बताकर उसे शत्रुसेना के विनाश के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  6.62.15-16h 
हन्त पश्यस्व लङ्कायां वनान्युपवनानि च॥ १५॥
सेतुना सुखमागत्य वानरैकार्णवं कृतम्।
 
 
अनुवाद
"हाय! देखो! समुद्र पर सेतु बनाकर प्रसन्नतापूर्वक यहाँ आए हुए वानरों ने लंका के समस्त वन और उद्यानों को जल से परिपूर्ण कर दिया है - यहाँ वानरों रूपी जल का समुद्र लहरा रहा है॥15 1/2॥
 
"Alas! Look! The monkeys who have happily come here after building a bridge over the ocean have made all the forests and gardens of Lanka full of water - here the sea of ​​water in the form of monkeys is waving.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)