श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.61.9 
येन वैवस्वतो युद्धे वासवश्च पराजित:।
सैष विश्रवस: पुत्र: कुम्भकर्ण: प्रतापवान्।
अस्य प्रमाणसदृशो राक्षसोऽन्यो न विद्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जिसने वैवस्वत यम और देवराज इन्द्र को युद्ध में परास्त किया था, वही विश्रवा का पराक्रमी पुत्र कुम्भकर्ण है। उसके समान कोई दूसरा दैत्य नहीं है॥9॥
 
Lord! The one who defeated Vaivasvat Yama and Devraj Indra in the war is the same Kumbhakarna, the valiant son of Vishrava. There is no other demon as tall as him.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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