श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.61.7 
आचक्ष्व सुमहान् कोऽसौ रक्षो वा यदि वासुर:।
न मयैवंविधं भूतं दृष्टपूर्वं कदाचन॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विभीषण! बताओ, यह इतना विशाल पुरुष कौन है? क्या यह राक्षस है या शैतान? मैंने ऐसा प्राणी पहले कभी नहीं देखा।'
 
Vibhishana! Tell me. Who is this man of such a huge stature? Is he a demon or a devil? I have never seen such a creature before.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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