श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.61.37 
राघवेण समादिष्टो नीलो हरिचमूपति:।
शशास वानरानीकं यथावत् कपिकुञ्जर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी की यह आज्ञा पाकर वानर सेनापति कपिश्रेष्ठ नील ने वानर सैनिकों को उचित कार्य करने का आदेश दिया ॥37॥
 
On receiving this command from Shri Raghunathji, the monkey commander Kapishreshtha Neel ordered the monkey soldiers to do the appropriate task. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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