श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.61.33 
उच्यन्तां वानरा: सर्वे यन्त्रमेतत् समुच्छ्रितम्।
इति विज्ञाय हरयो भविष्यन्तीह निर्भया:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘सब वानरों को बता देना चाहिए कि यह कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि शरीर द्वारा निर्मित एक लंबा यंत्र है। ऐसा जानकर वे निर्भय हो जाएँगे।’॥33॥
 
‘All the monkeys should be told that this is not a person but just a tall machine made by the body. Knowing this the monkeys will become fearless.'॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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