श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.61.24 
ध्रुवं लोकविनाशाय पौलस्त्येनासि निर्मित:।
तस्मात् त्वमद्यप्रभृति मृतकल्प: शयिष्यसे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कुम्भकर्ण! तुम निश्चय ही इस संसार का नाश करने के लिए उत्पन्न हुए हो; इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूँ कि आज से तुम मृत व्यक्ति की भाँति सो जाओगे।
 
Kumbhakarna! You have surely been born to destroy this world; therefore I curse you, from today onwards you will sleep like a dead person.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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