vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना
»
श्लोक 22
श्लोक
6.61.22
वासवस्य वच: श्रुत्वा सर्वलोकपितामह:।
रक्षांस्यावाहयामास कुम्भकर्णं ददर्श ह॥ २२॥
अनुवाद
इन्द्र के ये वचन सुनकर समस्त जगत के पिता ब्रह्माजी ने सब दैत्यों को बुलाया और कुम्भकर्ण से भी मिले॥22॥
Hearing these words of Indra, Brahma, the father of all the world, called all the demons and also met Kumbhakarna. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×