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श्लोक 6.61.21  |
एवं प्रजा यदि त्वेष भक्षयिष्यति नित्यश:।
अचिरेणैव कालेन शून्यो लोको भविष्यति॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| इन्द्र ने कहा- 'प्रभु! यदि वह इसी प्रकार प्रतिदिन प्रजाजनों को खाता रहेगा, तो थोड़े ही समय में सारा जगत् उजाड़ हो जाएगा॥21॥ |
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| Indra said-'Lord! If he continues to eat the people like this every day, then in a short time the whole world will become desolate. 21॥ |
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