श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.61.21 
एवं प्रजा यदि त्वेष भक्षयिष्यति नित्यश:।
अचिरेणैव कालेन शून्यो लोको भविष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा- 'प्रभु! यदि वह इसी प्रकार प्रतिदिन प्रजाजनों को खाता रहेगा, तो थोड़े ही समय में सारा जगत् उजाड़ हो जाएगा॥21॥
 
Indra said-'Lord! If he continues to eat the people like this every day, then in a short time the whole world will become desolate. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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