श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.61.13 
बालेन जातमात्रेण क्षुधार्तेन महात्मना।
भक्षितानि सहस्राणि प्रजानां सुबहून्यपि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस विशालकाय राक्षस ने जन्म के समय ही बचपन में भूख से व्याकुल होकर हजारों लोगों को खा लिया था।
 
This gigantic demon, at the very moment of his birth, being afflicted with hunger in his childhood, had devoured thousands of people.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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