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ramayan 6.60.98: वह पर्वत शिखर के समान ऊँचा था। उसके सिर पर मुकुट शोभायमान था। वह अपने तेज से सूर्य को स्पर्श करता हुआ प्रतीत हो रहा था। उस विशाल एवं अद्भुत राक्षस को देखकर समस्त वनवासी वानर भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे॥98॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  6.60.98 
तमद्रिशृङ्गप्रतिमं किरीटिनं
स्पृशन्तमादित्यमिवात्मतेजसा।
वनौकस: प्रेक्ष्य विवृद्धमद्भुतं
भयार्दिता दुद्रुविरे यतस्तत:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
वह पर्वत शिखर के समान ऊँचा था। उसके सिर पर मुकुट शोभायमान था। वह अपने तेज से सूर्य को स्पर्श करता हुआ प्रतीत हो रहा था। उस विशाल एवं अद्भुत राक्षस को देखकर समस्त वनवासी वानर भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे॥98॥
 
He was as tall as a mountain peak. A crown looked beautiful on his head. He seemed to be touching the Sun with his brilliance. Seeing that huge and wonderful demon, all the forest dwelling monkeys were terrified and started running here and there.॥98॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे षष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें साठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)