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ramayan 6.60.97: उन वानरों में से कुछ तो शरणागतों पर दया करने वाले भगवान् श्री रामजी की शरण में गए। कुछ तो व्याकुल होकर गिर पड़े। कुछ तो पीड़ा से व्याकुल होकर चारों ओर दौड़कर इधर-उधर गिर पड़े और बहुत से वानर भय से पीड़ित होकर भूमि पर लेट गए॥97॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  6.60.97 
केचिच्छरण्यं शरणं स्म रामं
व्रजन्ति केचिद् व्यथिता: पतन्ति।
केचिद् दशश्च व्यथिता: पतन्ति
केचिद् भयार्ता भुवि शेरते स्म॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
उन वानरों में से कुछ तो शरणागतों पर दया करने वाले भगवान् श्री रामजी की शरण में गए। कुछ तो व्याकुल होकर गिर पड़े। कुछ तो पीड़ा से व्याकुल होकर चारों ओर दौड़कर इधर-उधर गिर पड़े और बहुत से वानर भय से पीड़ित होकर भूमि पर लेट गए॥97॥
 
Some of those monkeys took refuge in Lord Shri Ram who is kind to those who seek refuge. Some fell down in distress. Some, in pain, ran in all directions and fell here and there and many monkeys, afflicted with fear, lay down on the ground.॥97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)