श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.60.94 
कुम्भकर्णो बभौ रुष्ट: कालान्तकयमोपम:।
भ्रातु: स भवनं गच्छन् रक्षोबलसमन्वित:।
कुम्भकर्ण: पदन्यासैरकम्पयत मेदिनीम्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब कुम्भकर्ण राक्षसों की सेना के साथ अपने भाई के महल की ओर गया, तब वह क्रोध में भरा हुआ प्रलयंकर यमराज के समान शोभा पा रहा था। कुम्भकर्ण अपने पैरों की ध्वनि से सम्पूर्ण पृथ्वी को कम्पित कर रहा था॥94॥
 
Then when Kumbhakarna went towards his brother's palace with the army of demons, he looked like Yamaraja, the destroyer of the doomsday filled with rage. Kumbhakarna was making the entire earth tremble with the sound of his feet.॥ 94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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