श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  6.60.93 
पीत्वा घटसहस्रे द्वे गमनायोपचक्रमे।
ईषत्समुत्कटो मत्तस्तेजोबलसमन्वित:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
कुम्भकर्ण दो हजार घड़े मदिरा पीकर जाने को तैयार हुआ। इससे उसे कुछ ताजगी मिली और वह मतवाला, तेजस्वी और शक्तिशाली हो गया॥93॥
 
Kumbhakarana prepared to leave after drinking two thousand pots of wine. This refreshed him a little and he became drunk, radiant and powerful.॥93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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