श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.60.85 
तेऽभिगम्य दशग्रीवमासीनं परमासने।
ऊचुर्बद्धाञ्जलिपुटा: सर्व एव निशाचरा:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
दशग्रीव एक भव्य सिंहासन पर बैठे थे। सब राक्षस हाथ जोड़कर उनके पास गए और बोले: ॥85॥
 
Daśagriva was seated on a magnificent throne. All the demons went to him with folded hands and said: ॥ 85॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas