श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  6.60.82 
रावणस्य वच: श्रुत्वा गुणदोषौ विमृश्य च।
पश्चादपि महाबाहो शत्रून् युधि विजेष्यसि॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! पहले जाकर राजा रावण की बात सुनो। फिर गुण-दोषों पर विचार करके युद्ध में शत्रुओं को परास्त करो।॥ 82॥
 
‘Mahabaho! First go and listen to King Ravana. Then after considering the merits and demerits, defeat the enemies in the war.’॥ 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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