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ramayan 6.60.81: क्रोध और क्रोध में भरे हुए कुम्भकर्ण के अभिमानपूर्ण वचन सुनकर राक्षस योद्धाओं में प्रधान महोदर ने हाथ जोड़कर यह कहा-॥81॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.81 
तत् तस्य वाक्यं ब्रुवतो निशम्य
सगर्वितं रोषविवृद्धदोषम्।
महोदरो नैर्ऋतयोधमुख्य:
कृताञ्जलिर्वाक्यमिदं बभाषे॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
क्रोध और क्रोध में भरे हुए कुम्भकर्ण के अभिमानपूर्ण वचन सुनकर राक्षस योद्धाओं में प्रधान महोदर ने हाथ जोड़कर यह कहा-॥81॥
 
Hearing the arrogant words of Kumbhakarna, filled with anger and anger, Mahodara, the chief of the demon warriors, said this with folded hands -॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)