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श्लोक 6.60.80  |
राक्षसांस्तर्पयिष्यामि हरीणां मांसशोणितै:।
रामलक्ष्मणयोश्चापि स्वयं पास्यामि शोणितम्॥ ८०॥ |
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| अनुवाद |
| आज मैं वानरों के मांस और रक्त से राक्षसों को तृप्त करूँगा और स्वयं राम और लक्ष्मण का रक्त पीऊँगा।’ ॥80॥ |
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| Today I will satisfy the demons with the flesh and blood of the monkeys and I will myself drink the blood of Rama and Lakshmana.' ॥ 80॥ |
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