श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  6.60.78 
स यूपाक्षवच: श्रुत्वा भ्रातुर्युधि पराभवम्।
कुम्भकर्णो विवृत्ताक्षो यूपाक्षमिदमब्रवीत्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में अपने भाई की पराजय के विषय में यूपक्ष के ये वचन सुनकर कुम्भकर्ण विस्फारित नेत्रों से देखने लगा और यूपक्ष से इस प्रकार बोला-॥78॥
 
On hearing these words of Yupaksha relating to the defeat of his brother in the war, Kumbhakarna started looking with wide eyes and spoke to Yupaksha thus -॥ 78॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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