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ramayan 6.60.77: जो काम देवता, दानव और राक्षस भी राजा के लिए नहीं कर सके, वह राम ने कर दिखाया। उसके प्राण महान संकट से बच गए।॥77॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  6.60.77 
यन्न देवै: कृतो राजा नापि दैत्यैर्न दानवै:।
कृत: स इह रामेण विमुक्त: प्राणसंशयात्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
जो काम देवता, दानव और राक्षस भी राजा के लिए नहीं कर सके, वह राम ने कर दिखाया। उसके प्राण महान संकट से बच गए।॥77॥
 
What even the gods, demons and devils could not do for the king, Ram did that. His life has been saved from a great danger.'॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)