श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.60.74 
वानरै: पर्वताकारैर्लङ्केयं परिवारिता।
सीताहरणसंतप्ताद् रामान्नस्तुमुलं भयम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
'पहाड़ के समान विशाल वानरों ने आकर इस लंका नगरी को चारों ओर से घेर लिया है। सीता के अपहरण से क्रोधित श्री राम से हमें अत्यधिक भय हो गया है।' 74.
 
‘Mountain-sized monkeys have come and surrounded this city of Lanka from all sides. We have got immense fear from Shri Ram who is enraged by the abduction of Sita. 74.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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