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ramayan 6.60.72: महाराज! हमें देवताओं से कभी भय नहीं हो सकता। इस समय तो हमें केवल एक मनुष्य से ही बड़ा भय है, जो हमें सता रहा है।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.72 
न नो देवकृतं किंचिद् भयमस्ति कदाचन।
मानुषान्नो भयं राजंस्तुमुलं सम्प्रबाधते॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हमें देवताओं से कभी भय नहीं हो सकता। इस समय तो हमें केवल एक मनुष्य से ही बड़ा भय है, जो हमें सता रहा है।
 
‘Maharaj! We can never have any fear from the gods. Right now we have got immense fear from only one human being, who is tormenting us. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)