श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.60.70 
न ह्यल्पकारणे सुप्तं बोधयिष्यति मादृशम्।
तदाख्यातार्थतत्त्वेन मत्प्रबोधनकारणम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
मेरे जैसा मनुष्य किसी भी छोटे से कारण से नींद से नहीं जागता, अतः आप लोग मुझे ठीक-ठीक बताइए कि मेरे जागने का क्या कारण है?॥ 70॥
 
‘A person like me will not be awakened from sleep for any small reason. So you all tell me exactly, what is the reason for my being awakened?’॥ 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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