देवदानवगन्धर्वैर्यक्षराक्षसपन्नगै:।
अवध्यत्वं मया प्रोक्तं मानुषेभ्यो न याचितम्॥ ७॥
अनुवाद
मैंने तो देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, यक्षों, राक्षसों और नागों से ही अविनाशी होने का वरदान माँगा था, मनुष्यों से तो मैंने निर्भय होने का वरदान नहीं माँगा था॥7॥
I had asked for the boon of becoming indestructible only from gods, demons, Gandharvas, Yakshas, demons and snakes, I had not asked for the boon of becoming fearless from humans. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥