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ramayan 6.60.69: ठीक है, आज मैं राक्षसराज का भय मिटा दूँगा। महेन्द्र (पर्वत या इन्द्र) को फाड़ डालूँगा और अग्नि को भी शीतल कर दूँगा।॥69॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.60.69 
अद्य राक्षसराजस्य भयमुत्पाटयाम्यहम्।
दारयिष्ये महेन्द्रं वा शीतयिष्ये तथानलम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
ठीक है, आज मैं राक्षसराज का भय मिटा दूँगा। महेन्द्र (पर्वत या इन्द्र) को फाड़ डालूँगा और अग्नि को भी शीतल कर दूँगा।॥69॥
 
Okay, today I will uproot the fear of the demon king. I will tear apart Mahendra (mountain or Indra) and cool down the fire as well.॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)