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श्लोक 6.60.69  |
अद्य राक्षसराजस्य भयमुत्पाटयाम्यहम्।
दारयिष्ये महेन्द्रं वा शीतयिष्ये तथानलम्॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| ठीक है, आज मैं राक्षसराज का भय मिटा दूँगा। महेन्द्र (पर्वत या इन्द्र) को फाड़ डालूँगा और अग्नि को भी शीतल कर दूँगा।॥69॥ |
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| Okay, today I will uproot the fear of the demon king. I will tear apart Mahendra (mountain or Indra) and cool down the fire as well.॥ 69॥ |
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