Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.60.68: अथवा निश्चय ही यहाँ दूसरों के कारण कोई बड़ा भय उत्पन्न हो गया है, और उसे दूर करने के लिए तुमने मुझे इतनी जल्दी जगा दिया है।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  6.60.68 
अथवा ध्रुवमन्येभ्यो भयं परमुपस्थितम्।
यदर्थमेव त्वरितैर्भवद्भि: प्रतिबोधित:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
अथवा निश्चय ही यहाँ दूसरों के कारण कोई बड़ा भय उत्पन्न हो गया है, और उसे दूर करने के लिए तुमने मुझे इतनी जल्दी जगा दिया है।
 
Or surely some great fear has arisen here from others, and to dispel it you have awakened me in such haste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)