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ramayan 6.60.67: 'आपने मुझे इतने आदर से क्यों जगाया है? राक्षसराज रावण कुशल से तो है? यहाँ कोई भय तो नहीं है?॥67॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.67 
किमर्थमहमादृत्य भवद्भि: प्रतिबोधित:।
कच्चित् सुकुशलं राज्ञो भयं वा नेह किंचन॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
'आपने मुझे इतने आदर से क्यों जगाया है? राक्षसराज रावण कुशल से तो है? यहाँ कोई भय तो नहीं है?॥67॥
 
‘Why have you awakened me with such respect? Is the demon king Ravana alright? Is there any fear here?॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)