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ramayan 6.60.65: उस समय उसकी आँखें थोड़ी खुली हुई थीं और नींद के कारण गंदी लग रही थीं। उसने इधर-उधर देखा तो वहाँ रात्रिचर जीव खड़े दिखाई दिए। 65.   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.60.65 
निद्राविशदनेत्रस्तु कलुषीकृतलोचन:।
चारयन् सर्वतो दृष्टिं तान् ददर्श निशाचरान्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसकी आँखें थोड़ी खुली हुई थीं और नींद के कारण गंदी लग रही थीं। उसने इधर-उधर देखा तो वहाँ रात्रिचर जीव खड़े दिखाई दिए। 65.
 
At that time his eyes were slightly open and looked dirty due to sleep. He looked around and saw the nocturnal creatures standing there. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)