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ramayan 6.60.54: तत्पश्चात् रस्सियों से बंधी हुई शतघ्नियों द्वारा उस पर चारों ओर से प्रहार होने लगे, फिर भी उस महादैत्य की निद्रा नहीं खुली। 54.   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.54 
रज्जुबन्धनबद्धाभि: शतघ्नीभिश्च सर्वत:।
वध्यमानो महाकायो न प्राबुध्यत राक्षस:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रस्सियों से बंधी हुई शतघ्नियों द्वारा उस पर चारों ओर से प्रहार होने लगे, फिर भी उस महादैत्य की निद्रा नहीं खुली। 54.
 
Thereafter he began to be hit from all sides by the Shataghnis tied with ropes. Even then the sleep of that gigantic demon did not wake up. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)