श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.60.51 
अन्ये भेरी: समाजघ्नुरन्ये चक्रुर्महास्वनम्।
केशानन्ये प्रलुलुपु: कर्णानन्ये दशन्ति च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
कोई तो घूँसे मारने लगे, कोई तो बड़ा शोर मचाने लगे, कोई कुम्भकर्ण के बाल नोचने लगे और कोई उसके कान दाँतों से काटने लगे ॥51॥
 
Some began to blow blows, some began to make a great noise, some began to pull out Kumbhakarna's hair and some began to bite his ears with their teeth. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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