श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.60.37 
नेदुरास्फोटयामासुश्चिक्षिपुस्ते निशाचरा:।
कुम्भकर्णविबोधार्थं चक्रुस्ते विपुलं स्वरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे रात्रि में सिंहनाद करने लगे, ढोल बजाने लगे और कुंभकर्ण के अंग हिलाने लगे। कुंभकर्ण को जगाने के लिए उन्होंने बहुत जोर से शब्द किया ॥37॥
 
They started making lion noises at night, beating drums and shaking various parts of Kumbhakarna. To wake up Kumbhakarna, he made a very loud sound. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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