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ramayan 6.60.27: कुंभकर्ण गहरी नींद में था और बिखरे हुए पर्वत की तरह विकृत अवस्था में खर्राटे ले रहा था। तब सभी राक्षस एकत्रित हुए और उसे जगाने की कोशिश की।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.27 
ते तु तं विकृतं सुप्तं विकीर्णमिव पर्वतम्।
कुम्भकर्णं महानिद्रं समेता: प्रत्यबोधयन्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण गहरी नींद में था और बिखरे हुए पर्वत की तरह विकृत अवस्था में खर्राटे ले रहा था। तब सभी राक्षस एकत्रित हुए और उसे जगाने की कोशिश की।
 
Kumbhakarna was in deep sleep and was snoring in a deformed state like a scattered mountain. So all the demons gathered together and tried to wake him up.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)