Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.59.98: हे दैत्यराज! (क्योंकि तुमने एक निर्जन घर से एक असहाय स्त्री का चुपके से अपहरण कर लिया था) मैं तुम्हारे बल, पराक्रम, तेज और पराक्रम को भली-भाँति जानता हूँ; इसीलिए मैं धनुष-बाण लेकर तुम्हारे सामने खड़ा हूँ। आओ और युद्ध करो। व्यर्थ की बातें करने से क्या लाभ?॥98॥ | ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे दैत्यराज! (क्योंकि तुमने एक निर्जन घर से एक असहाय स्त्री का चुपके से अपहरण कर लिया था) मैं तुम्हारे बल, पराक्रम, तेज और पराक्रम को भली-भाँति जानता हूँ; इसीलिए मैं धनुष-बाण लेकर तुम्हारे सामने खड़ा हूँ। आओ और युद्ध करो। व्यर्थ की बातें करने से क्या लाभ?॥98॥
‘King of demons! (Because you secretly kidnapped a helpless woman from an empty house) I know very well about your strength, courage, glory and valour; that is why I am standing in front of you with bow and arrow in my hand. Come and fight. What will be the use of talking uselessly?’॥98॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥