श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  6.59.97 
तमाह सौमित्रिरविस्मयानो
गर्जन्तमुद‍्वृत्तशिताग्रदंष्ट्रम्।
राजन् न गर्जन्ति महाप्रभावा
विकत्थसे पापकृतां वरिष्ठ॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रापुत्र लक्ष्मण को उनके वचन सुनकर आश्चर्य नहीं हुआ। उनके दाँत बड़े तीखे और प्रचण्ड थे और वे जोर-जोर से दहाड़ रहे थे। उस समय सुमित्रापुत्र ने उनसे कहा - 'राजन्! बड़े-बड़े प्रभावशाली पुरुष आपकी तरह केवल दहाड़ते ही नहीं (कुछ पराक्रम दिखाते हैं)। हे पापियों में अग्रणी रावण! आप केवल मिथ्या डींगें मारते हैं।' 97.
 
Sumitra's son Lakshman was not surprised to hear his words. His teeth were very sharp and intense and he was roaring loudly. At that time Sumitra's son said to him - 'King! Great influential men do not only roar like you (show some valor). Ravana, the leader among sinners! You only boast falsely. 97.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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