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ramayan 6.59.94: उस समय दानवीर और पराक्रमी लक्ष्मण ने अपना अतुलनीय धनुष खींचकर रावण से कहा - "हे राक्षसराज! समझ लो कि मैं आ गया हूँ। अतः अब तुम्हें वानरों के साथ युद्ध नहीं करना चाहिए।"॥94॥   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.59.94 
तमाह सौमित्रिरदीनसत्त्वो
विस्फारयन्तं धनुरप्रमेयम्।
अवेहि मामद्य निशाचरेन्द्र
न वानरांस्त्वं प्रतियोद्धुमर्हसि॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
उस समय दानवीर और पराक्रमी लक्ष्मण ने अपना अतुलनीय धनुष खींचकर रावण से कहा - "हे राक्षसराज! समझ लो कि मैं आ गया हूँ। अतः अब तुम्हें वानरों के साथ युद्ध नहीं करना चाहिए।"॥94॥
 
At that time, drawing his matchless bow, the generous and powerful Lakshmana said to Ravana, "O King of the demons! Understand that I have arrived. Hence, you should not fight with the monkeys now."॥94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)