श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.59.92 
विसंज्ञं वानरं दृष्ट्वा दशग्रीवो रणोत्सुक:।
रथेनाम्बुदनादेन सौमित्रिमभिदुद्रुवे॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
नील वानर को अचेत देखकर युद्धोन्माद में लीन रावण ने मेघों की गर्जना के समान गम्भीर ध्वनि करने वाले अपने रथ से सुमित्रापुत्र लक्ष्मण पर आक्रमण किया।
 
Seeing the monkey Neel unconscious, the war-hungry Ravana attacked Sumitra's son Lakshman with his chariot which made a deep sound like the roar of the clouds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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