श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.59.85 
आग्नेयेनापि संयुक्तं गृहीत्वा रावण: शरम्।
ध्वजशीर्षस्थितं नीलमुदैक्षत निशाचर:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रात्रि में रावण ने नील को ध्वजा के अग्रभाग पर हाथ में आग्नेयास्त्र से खींचा हुआ बाण लिए बैठे देखा ॥85॥
 
Thereafter, in the night, Ravana saw Neel sitting on the front of the flag with an arrow drawn from a firearm in his hand. 85॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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