श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  6.59.80 
पावकात्मजमालोक्य ध्वजाग्रे समवस्थितम्।
जज्वाल रावण: क्रोधात् ततो नीलो ननाद च॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
अग्निपुत्र नील को अपने ध्वज पर बैठा देखकर रावण क्रोध से जल उठा और नील जोर-जोर से दहाड़ने लगा।
 
On seeing Neel, the son of Agni, sitting on his flag, Ravana burned with rage and Neel began to roar loudly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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