श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  6.59.79 
अभिवृष्ट: शरौघेण मेघेनेव महाचल:।
ह्रस्वं कृत्वा ततो रूपं ध्वजाग्रे निपपात ह॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार बादल किसी विशाल पर्वत पर जल बरसाता है, उसी प्रकार जब रावण ने नील पर बाण बरसाए तो वे छोटा रूप धारण करके रावण के ध्वज के शिखर पर चढ़ गए।
 
Just as a cloud showers its water on a great mountain, similarly when Ravana showered his arrows on Neel, they took a small form and climbed to the top of Ravana's flag.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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